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नादब्रह्म: संगीत और चेतना का दिव्य मिलन
नादब्रह्म: संगीत और चेतना का दिव्य मिलन से जानें भारतीय संगीत की आध्यात्मिक गहराई और ब्रह्मांडीय व्यापकता। नादब्रह्म: संगीत और चेतना का दिव्य मिलन का अन्वेषण करें।
भारतीय संस्कृति में संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार और ईश्वर प्राप्ति का एक मार्ग माना गया है। प्राचीन ऋषियों और शास्त्रकारों ने ध्वनि (Sound) को 'ब्रह्म' का स्वरूप माना है। इसी दार्शनिक पक्ष को १३वीं शताब्दी के महान संगीतज्ञ पंडित श्राङ्गदेव ने अपने ग्रंथ 'सङ्गीतरत्नाकर' के मंगलाचर

Dr.Madhavi Srivastava
31 मार्च4 मिनट पठन


श्रीकृष्ण विग्रह में अवतारों का विलय और पृथ्वी पर आगमन
जब समस्त देवताओं ने यह अद्भुत दृश्य देखा कि वैकुण्ठाधिपति नारायण, नृसिंह, राम, यज्ञनारायण तथा अन्य सभी दिव्य अवतार भगवान श्रीकृष्ण के श्रीविग्रह में विलीन हो गए, तब उनका समस्त संशय नष्ट हो गया। वे समझ गए कि श्रीकृष्ण ही परम सत्य, परम कारण और समस्त अवतारों के मूल हैं।
इस अनुभूति से अभिभूत होकर उन्होंने विनम्रतापूर्वक भगवान की स्तुति की—
देवताओं ने कहा—“हे प्रभो! आप योगियों के लिए अगाध, अगम्य और परम तेजस्वरूप हैं, जिन्हें केवल समाधि में ही अनुभव किया जा सकता है। किन्तु

Dr.Madhavi Srivastava
27 मार्च4 मिनट पठन


श्री गोलोकधाम का अद्भुत दर्शन | ब्रह्मादि देवों की दिव्य यात्रा (श्री गर्ग-संहिता)
जब शास्त्र केवल कथाएँ नहीं रहते, बल्कि स्वयं अनुभव बन जाते हैं—तब वे हृदय को छूते ही नहीं, उसे रूपान्तरित कर देते हैं। श्रीगर्ग-संहिता का यह द्वितीय अध्याय हमें उसी दिव्य अनुभूति के द्वार पर ले आता है, जहाँ तर्क की सीमा समाप्त हो जाती है और भक्ति का आलोक प्रारम्भ होता है।
यहाँ वर्णित गोलोकधाम कोई कल्पना नहीं, बल्कि उस परम चेतना का प्रतीक है जहाँ प्रेम ही तत्त्व है, आनन्द ही स्वभाव है और श्रीकृष्ण ही सर्वस्व हैं। ब्रह्मा, विष्णु और शिव जैसे देवताओं का भी जिस धाम में प्रवेश वि

Dr.Madhavi Srivastava
21 मार्च4 मिनट पठन


क्यों श्रीकृष्ण हैं परिपूर्णतम अवतार?| अवतारों का दिव्य रहस्य (गर्गसंहिता)
श्रीगर्ग-संहिता का गोलोकखण्ड भगवान् श्रीकृष्ण की परम दिव्य महिमा, उनके अद्वितीय स्वरूप तथा उनके अवतारों के रहस्य का अत्यन्त सूक्ष्म एवं आध्यात्मिक निरूपण प्रस्तुत करता है। यह ग्रन्थ केवल कथा नहीं, बल्कि भक्ति, तत्त्वज्ञान और दिव्य अनुभूति का संगम है।
प्रथम अध्याय में शौनक, गर्ग, नारद तथा राजा बहुलाश्व के संवाद के माध्यम से यह बताया गया है कि भगवान् किस प्रकार अपनी योगमाया से अवतार धारण करते हैं तथा उनके अवतारों के भेद क्या हैं। यह अध्याय साधक के भीतर श्रद्धा, जिज्ञासा और भक्

Dr.Madhavi Srivastava
20 मार्च4 मिनट पठन


“नास्ति तेषु जातिविद्यारूपकुलधनक्रियादिभेदः”भक्ति में समता का सिद्धांत
भक्ति-दृष्टि में आध्यात्मिक सिद्धि कोई सामाजिक उपलब्धि नहीं, अपितु आंतरिक आत्मनिवेदन की परिणति है। जो साधक अपने समस्त अस्तित्व को ईश्वर के प्रति समर्पित कर देता है, जो निरंतर प्रेमपूर्वक उनका स्मरण करता है, और जिसका मन दिव्य चिंतन में निमग्न हो जाता है, वही भक्ति रूपी दुर्लभ रत्न का अधिकारी बनता है। इतिहास और पवित्र आख्यानों में ऐसे अनेक प्रेरणादायक उदाहरण उपलब्ध हैं, जो इस सत्य की पुष्टि करते हैं। अल्पकुल में जन्मे निषाद, कसाई सदन, सरल हृदया शबरी, बालक ध्रुव, तथाकथित राक्षस

Dr.Madhavi Srivastava
15 मार्च5 मिनट पठन


भारतीय भक्ति परंपरा : एक जीवित दर्शन
भारतीय भक्ति परंपरा को केवल भावुक भक्ति या काव्यात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं किया जा सकता। यह मध्यकालीन भारत में उदित एक क्रांतिकारी आध्यात्मिक आंदोलन था, जिसने उस समय के दार्शनिक, सामाजिक और धार्मिक वातावरण को गहराई से प्रभावित किया।
बारहवीं से सत्रहवीं शताब्दी के बीच विकसित इस आंदोलन ने कठोर कर्मकांडों की अनिवार्यता को चुनौती दी, जाति-व्यवस्था की ऊँच-नीच पर प्रश्न उठाया, और आध्यात्मिक साधना को केवल बौद्धिक चिंतन से हटाकर प्रत्यक्ष अनुभव और अंतर्मन की अनुभूति की ओर मोड़ दि

Dr.Madhavi Srivastava
7 मार्च9 मिनट पठन


“जासु नाम जपि सुनहु भवानी…” – रामनाम की महिमा
यह चौपाई रामचरितमानस के सुंदरकांड में आती है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की। चौपाई इस प्रकार है —
सुंदरकांड में जब हनुमान माता सीता की खोज करते हुए लंका पहुँचते हैं, तब वे अशोक वाटिका उजाड़ देते हैं और राक्षसों का संहार करते हैं। अंततः उन्हें रावण की सभा में बाँधकर लाया जाता है।
उसी समय भगवान शिव, माता पार्वती (भवानी) से यह रहस्य बताते हैं —
“हे भवानी! जिन प्रभु राम का नाम जपकर ज्ञानीजन संसार के बंधनों को काट देते हैं, उनके दूत हनुमान क्या सचमुच बंध सकते हैं? वे तो केवल

Dr.Madhavi Srivastava
28 फ़र॰5 मिनट पठन


प्रभुजी तुम चंदन हम पानी: संत रैदास की वाणी
रैदास जी प्रतिदिन प्रातः लगभग 3 बजे, वह पवित्र स्नान के लिए गंगा नदी में जाते थे। एक दिन, स्नान करते समय, उन्हें नदी की रेत में एक चिकना, गोल पत्थर मिला। उसकी सुंदरता देखकर, उन्हें उसमें एक दिव्य उपस्थिति का आभास हुआ और वे उसे ईश्वर का स्वरूप मानकर घर ले आए।उन्होंने एक नीम के पेड़ के नीचे एक छोटी सी झोपड़ी बनाई, उस पत्थर को श्रद्धापूर्वक उसमें रखा, और प्रतिदिन अत्यंत भक्तिभाव से उसकी पूजा करने लगे। भक्ति में लीन होकर, वे अक्सर गाया करते थे--
"प्रभुजी तुम चंदन हम पानी, जाके अं

Dr.Madhavi Srivastava
14 फ़र॰5 मिनट पठन


कमल की तरह जीना सीखें: काम के तनाव और असफलता के डर से मुक्ति का दिव्य मार्ग
आज की सबसे बड़ी समस्या 'परिणाम की चिंता' (Anxiety of Results) और 'अहंकार' (The Ego of Doership) है। हम काम इसलिए नहीं करते कि वह हमारा कर्तव्य है, बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि हमें उससे कुछ चाहिए—नाम, पैसा या फेम। और जब नतीजा वैसा नहीं मिलता जैसा हमने सोचा था, तो हम टूट जाते हैं। हम 'पाप' या गलतियों के डर से इतने सहमे रहते हैं कि कठिन फैसले लेने से कतराते हैं। हम दुनिया के 'पानी' में पूरी तरह भीग चुके हैं, यानी सांसारिक तनाव हमारे भीतर तक समा गया है।

Dr.Madhavi Srivastava
12 फ़र॰3 मिनट पठन


राजकुमार राम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम (भाग -3)
"नहीं, राम दोषी मैं हूं" जटायु कष्ट से कहराते हुए कहता है। "मैंने उस दुष्ट रावण से जानकी को बचाने का बहुत प्रयास किया परंतु सफल न हो सका, वह धूर्त शूर्पनखा का भाई है और लंका में निवास करता है। वह जानकी को दक्षिण दिशा की ओर ले गया है।" यह कहते ही जटायु के प्राण निकल जाते हैं। राम उसका अन्तिम संस्कार उसी तरह करते है जैसे एक पुत्र अपने पिता का करता है। अपने पिता की मृत्यु की समय वह अयोध्या में नहीं थे, अतः राम जटायु की अंतिमक्रिया एक पुत्र की भांति ही कर अपने उस अधूरे कार्य को प

Dr.Madhavi Srivastava
8 फ़र॰4 मिनट पठन


राजकुमार राम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम (भाग-२)
भरत के द्वारा राम की पादुका को अपने शिर पर धारण करके अयोध्या वापस जाने के पश्चात्, राम का मन अब चित्रकूट में नहीं लग रहा था। कदाचित अब चित्रकूट में भरत और माता की अनुपस्थिति उन्हें भाव-विभोर कर रही थी। अतः उन्होंने वह स्थान त्यागने का निश्चय किया।चित्रकूट से निकलने के पश्चात राम अत्री ऋषि के आश्रम पहुंचते हैं। अत्री ऋषि ने उन्हें दण्डकारण्य में प्रवेश के पूर्व सावधान करते हुए कहा—"राम यह दण्डकारण्य अनेक मायावी राक्षसों से भरा हुआ है। यह प्रदेश रावण के अधिकार क्षेत्र में आता ह

Dr.Madhavi Srivastava
7 फ़र॰4 मिनट पठन


राजकुमार राम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम
पंचवटी वह स्थान है,जहां राम का जीवन एक भयंकर करवट लेता है, जहाँ राम राजकुमार राम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम बनते हैं।यही वह स्थान है जहां काल चक्र अपना खेल खेलता है। ऐसा लगता है जैसे काल और महाकाल दोनों ही यहां मंचन कर रहे हो। काल चाह कर भी उस घटना को परिवर्तित नहीं कर सकता था, वहीं महाकाल का हृदय इन सब घटनाओं को देख कर राम की वंदना करने के लिए विवश हो उठता है। इधर राम सीता के वियोग में अश्रुओं के साथ महाकाल का स्मरण करते हैं, वहीं महाकाल भी समय और प्रारब्ध की विडंबना से विवश

Dr.Madhavi Srivastava
6 फ़र॰4 मिनट पठन


ऋत: ब्रह्मांड, धर्म और कर्म का शाश्वत आधार
"ऋत: ब्रह्मांड, धर्म और कर्म का शाश्वत आधार " ऋत वह शाश्वत अनुशासन है जो ब्रह्मांड, समाज और जीवन को संचालित करता है। ऋत, समाज से जुड़ता है, तो धर्म कहलाता है

Dr.Madhavi Srivastava
21 दिस॰ 20257 मिनट पठन


स्वतंत्र इच्छा: भगवद्गीता में आध्यात्मिकता का गहरा संदेश
'विमृष्यैतद् अशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु' की गहराई का अन्वेषण करें और चयन की स्वतंत्रता और आध्यात्मिक जागृति की खोज करें। 'विमृष्यैतद् अशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु' में गोता लगाएँ।

Dr.Madhavi Srivastava
6 नव॰ 20254 मिनट पठन


स्कंद: दिव्य योद्धा की उत्पत्ति और वीरता की गाथा
स्कंद: दिव्य योद्धा की उत्पत्ति और वीरता की गाथा- जानिए भगवान स्कंद की रहस्यमयी उत्पत्ति, प्रशिक्षण और तारकासुर के वध तक की अद्भुत कथा।एक दिव्य योद्धा की कहानी।

Dr.Madhavi Srivastava
13 अग॰ 20255 मिनट पठन


असंभव को संभव कैसे बनाएं: राम सेतु की प्रेरक कहानी
"असंभव को संभव कैसे बनाएं: राम सेतु की प्रेरक कहानी"-जहां विश्वास और भक्ति ने असंभव को संभव कर दिया।यह प्रेरणादायक कथा आपकी चुनौतियों को पार करने में मदद करेगी।

Dr.Madhavi Srivastava
16 मार्च 20257 मिनट पठन


नवधा भक्ति
Navdha Bhakti refers to nine types of devotion, each of which br a person closer to spiritual freedom by connecting closely with the divine.

Dr.Madhavi Srivastava
23 अक्टू॰ 20244 मिनट पठन


दिवाली का आध्यात्मिक महत्व
दीवाली, जिसे आमतौर पर प्रकाश पर्व के रूप में जाना जाता है, भारत और विश्व के अन्य क्षेत्रों में सबसे व्यापक रूप से मनाए जाने वाले त्योहारों म

Dr.Madhavi Srivastava
22 अक्टू॰ 20245 मिनट पठन


भगवद गीता, अध्याय 11, श्लोक 3
भगवद गीता, अध्याय 11, श्लोक 3 का सीधा अर्थ है: "जैसा आपने अपने परमेश्वर रूप का वर्णन किया है, वैसे ही मैं आपके उस असीम स्वरूप को देखना चाहता

Dr.Madhavi Srivastava
13 अक्टू॰ 20244 मिनट पठन


भगवद गीता, अध्याय 11, श्लोक 2
माहात्म्यमपि चाव्ययम् का अर्थ है कि भगवान का माहात्म्य अविनाशी है। यह बताता है कि भगवान का स्वरूप समय से परे और अनंत है। भगवान की महिमा का क

Dr.Madhavi Srivastava
12 अक्टू॰ 20243 मिनट पठन
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