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अखंड भक्ति: संत रैदास की वाणी
रैदास जी प्रतिदिन प्रातः लगभग 3 बजे, वह पवित्र स्नान के लिए गंगा नदी में जाते थे। एक दिन, स्नान करते समय, उन्हें नदी की रेत में एक चिकना, गोल पत्थर मिला। उसकी सुंदरता देखकर, उन्हें उसमें एक दिव्य उपस्थिति का आभास हुआ और वे उसे ईश्वर का स्वरूप मानकर घर ले आए।उन्होंने एक नीम के पेड़ के नीचे एक छोटी सी झोपड़ी बनाई, उस पत्थर को श्रद्धापूर्वक उसमें रखा, और प्रतिदिन अत्यंत भक्तिभाव से उसकी पूजा करने लगे। भक्ति में लीन होकर, वे अक्सर गाया करते थे--
"प्रभुजी तुम चंदन हम पानी, जाके अं

Dr.Madhavi Srivastava
14 फ़र॰5 मिनट पठन


कमल की तरह जीना सीखें: काम के तनाव और असफलता के डर से मुक्ति का दिव्य मार्ग
आज की सबसे बड़ी समस्या 'परिणाम की चिंता' (Anxiety of Results) और 'अहंकार' (The Ego of Doership) है। हम काम इसलिए नहीं करते कि वह हमारा कर्तव्य है, बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि हमें उससे कुछ चाहिए—नाम, पैसा या फेम। और जब नतीजा वैसा नहीं मिलता जैसा हमने सोचा था, तो हम टूट जाते हैं। हम 'पाप' या गलतियों के डर से इतने सहमे रहते हैं कि कठिन फैसले लेने से कतराते हैं। हम दुनिया के 'पानी' में पूरी तरह भीग चुके हैं, यानी सांसारिक तनाव हमारे भीतर तक समा गया है।

Dr.Madhavi Srivastava
12 फ़र॰3 मिनट पठन


राजकुमार राम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम (भाग -3)
"नहीं, राम दोषी मैं हूं" जटायु कष्ट से कहराते हुए कहता है। "मैंने उस दुष्ट रावण से जानकी को बचाने का बहुत प्रयास किया परंतु सफल न हो सका, वह धूर्त शूर्पनखा का भाई है और लंका में निवास करता है। वह जानकी को दक्षिण दिशा की ओर ले गया है।" यह कहते ही जटायु के प्राण निकल जाते हैं। राम उसका अन्तिम संस्कार उसी तरह करते है जैसे एक पुत्र अपने पिता का करता है। अपने पिता की मृत्यु की समय वह अयोध्या में नहीं थे, अतः राम जटायु की अंतिमक्रिया एक पुत्र की भांति ही कर अपने उस अधूरे कार्य को प

Dr.Madhavi Srivastava
8 फ़र॰4 मिनट पठन


राजकुमार राम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम (भाग-२)
भरत के द्वारा राम की पादुका को अपने शिर पर धारण करके अयोध्या वापस जाने के पश्चात्, राम का मन अब चित्रकूट में नहीं लग रहा था। कदाचित अब चित्रकूट में भरत और माता की अनुपस्थिति उन्हें भाव-विभोर कर रही थी। अतः उन्होंने वह स्थान त्यागने का निश्चय किया।चित्रकूट से निकलने के पश्चात राम अत्री ऋषि के आश्रम पहुंचते हैं। अत्री ऋषि ने उन्हें दण्डकारण्य में प्रवेश के पूर्व सावधान करते हुए कहा—"राम यह दण्डकारण्य अनेक मायावी राक्षसों से भरा हुआ है। यह प्रदेश रावण के अधिकार क्षेत्र में आता ह

Dr.Madhavi Srivastava
7 फ़र॰4 मिनट पठन


राजकुमार राम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम
पंचवटी वह स्थान है,जहां राम का जीवन एक भयंकर करवट लेता है, जहाँ राम राजकुमार राम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम बनते हैं।यही वह स्थान है जहां काल चक्र अपना खेल खेलता है। ऐसा लगता है जैसे काल और महाकाल दोनों ही यहां मंचन कर रहे हो। काल चाह कर भी उस घटना को परिवर्तित नहीं कर सकता था, वहीं महाकाल का हृदय इन सब घटनाओं को देख कर राम की वंदना करने के लिए विवश हो उठता है। इधर राम सीता के वियोग में अश्रुओं के साथ महाकाल का स्मरण करते हैं, वहीं महाकाल भी समय और प्रारब्ध की विडंबना से विवश

Dr.Madhavi Srivastava
6 फ़र॰4 मिनट पठन


ऋत: ब्रह्मांड, धर्म और कर्म का शाश्वत आधार
"ऋत: ब्रह्मांड, धर्म और कर्म का शाश्वत आधार " ऋत वह शाश्वत अनुशासन है जो ब्रह्मांड, समाज और जीवन को संचालित करता है। ऋत, समाज से जुड़ता है, तो धर्म कहलाता है

Dr.Madhavi Srivastava
21 दिस॰ 20257 मिनट पठन


स्वतंत्र इच्छा: भगवद्गीता में आध्यात्मिकता का गहरा संदेश
'विमृष्यैतद् अशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु' की गहराई का अन्वेषण करें और चयन की स्वतंत्रता और आध्यात्मिक जागृति की खोज करें। 'विमृष्यैतद् अशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु' में गोता लगाएँ।

Dr.Madhavi Srivastava
6 नव॰ 20254 मिनट पठन


स्कंद: दिव्य योद्धा की उत्पत्ति और वीरता की गाथा
स्कंद: दिव्य योद्धा की उत्पत्ति और वीरता की गाथा- जानिए भगवान स्कंद की रहस्यमयी उत्पत्ति, प्रशिक्षण और तारकासुर के वध तक की अद्भुत कथा।एक दिव्य योद्धा की कहानी।

Dr.Madhavi Srivastava
13 अग॰ 20255 मिनट पठन


असंभव को संभव कैसे बनाएं: राम सेतु की प्रेरक कहानी
"असंभव को संभव कैसे बनाएं: राम सेतु की प्रेरक कहानी"-जहां विश्वास और भक्ति ने असंभव को संभव कर दिया।यह प्रेरणादायक कथा आपकी चुनौतियों को पार करने में मदद करेगी।

Dr.Madhavi Srivastava
16 मार्च 20257 मिनट पठन


नवधा भक्ति
Navdha Bhakti refers to nine types of devotion, each of which br a person closer to spiritual freedom by connecting closely with the divine.

Dr.Madhavi Srivastava
23 अक्टू॰ 20244 मिनट पठन


दिवाली का आध्यात्मिक महत्व
दीवाली, जिसे आमतौर पर प्रकाश पर्व के रूप में जाना जाता है, भारत और विश्व के अन्य क्षेत्रों में सबसे व्यापक रूप से मनाए जाने वाले त्योहारों म

Dr.Madhavi Srivastava
22 अक्टू॰ 20245 मिनट पठन


भगवद गीता, अध्याय 11, श्लोक 3
भगवद गीता, अध्याय 11, श्लोक 3 का सीधा अर्थ है: "जैसा आपने अपने परमेश्वर रूप का वर्णन किया है, वैसे ही मैं आपके उस असीम स्वरूप को देखना चाहता

Dr.Madhavi Srivastava
13 अक्टू॰ 20244 मिनट पठन


भगवद गीता, अध्याय 11, श्लोक 2
माहात्म्यमपि चाव्ययम् का अर्थ है कि भगवान का माहात्म्य अविनाशी है। यह बताता है कि भगवान का स्वरूप समय से परे और अनंत है। भगवान की महिमा का क

Dr.Madhavi Srivastava
12 अक्टू॰ 20243 मिनट पठन


भगवद गीता, अध्याय 11, श्लोक 1
यहाँ अर्जुन यह स्वीकार कर रहे हैं कि भगवान कृष्ण ने जो ज्ञान उन्हें दिया है, वह अत्यंत गोपनीय और परम है। यह आध्यात्मिक ज्ञान है जिसे जानने क

Dr.Madhavi Srivastava
12 अक्टू॰ 20243 मिनट पठन


कबीर का सन्देश: बाहरी आडंबर से परे सच्ची भक्ति का मार्ग
कबीरदास जी का जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ था। वे एक संत, कवि और समाज सुधारक थे। उनका जीवन साधारण था, लेकिन उनकी सोच और उनके उपदेश समाज को जाग

Dr.Madhavi Srivastava
19 सित॰ 20246 मिनट पठन


श्री राम पंचरत्न स्तोत्रम्-महत्व, अर्थ और लाभ
श्री राम पंचरत्न स्तोत्रम् एक प्राचीन और दिव्य भक्ति स्तोत्र है, जिसे महान आद्य शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। यह स्तोत्र भगवान राम के

Dr.Madhavi Srivastava
18 सित॰ 20244 मिनट पठन


धन्याष्टकम्- शंकराचार्य के दस श्लोकों में छिपे गूढ़ ज्ञान का परिचय
धन्याष्टकम् श्रीमद् शंकराचार्य द्वारा रचित एक प्रसिद्ध स्तोत्र है जो अद्वैत वेदांत के सार का उत्कृष्ट वर्णन करता है। इस स्तोत्र में,...

Dr.Madhavi Srivastava
10 सित॰ 20245 मिनट पठन


आदित्य हृदयम्-एक अद्वितीय स्तोत्र का परिचय
आदित्य हृदयम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो न केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है...

Dr.Madhavi Srivastava
9 सित॰ 20247 मिनट पठन


संकट नाशन गणेश स्तोत्रम्-संकटों से मुक्ति का दिव्य उपाय
'संकट नाशन गणेश स्तोत्रम्' का उल्लेख 'नारद पुराण' में मिलता है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत फलदायी है जो अपने जीवन में

Dr.Madhavi Srivastava
31 अग॰ 20244 मिनट पठन


पौराणिक कथाओं में सर्पों का आकर्षण
पौराणिक सर्प कथाओं ने सदियों से विभिन्न संस्कृतियों में मानवता को आकर्षित किया है, रहस्य, शक्ति और आश्चर्य की कहानियाँ बुनी हैं। चीनी लोक...

Dr.Madhavi Srivastava
17 अग॰ 202417 मिनट पठन
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