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अखंड भक्ति: संत रैदास की वाणी
रैदास जी प्रतिदिन प्रातः लगभग 3 बजे, वह पवित्र स्नान के लिए गंगा नदी में जाते थे। एक दिन, स्नान करते समय, उन्हें नदी की रेत में एक चिकना, गोल पत्थर मिला। उसकी सुंदरता देखकर, उन्हें उसमें एक दिव्य उपस्थिति का आभास हुआ और वे उसे ईश्वर का स्वरूप मानकर घर ले आए।उन्होंने एक नीम के पेड़ के नीचे एक छोटी सी झोपड़ी बनाई, उस पत्थर को श्रद्धापूर्वक उसमें रखा, और प्रतिदिन अत्यंत भक्तिभाव से उसकी पूजा करने लगे। भक्ति में लीन होकर, वे अक्सर गाया करते थे--
"प्रभुजी तुम चंदन हम पानी, जाके अं

Dr.Madhavi Srivastava
14 फ़र॰5 मिनट पठन


कमल की तरह जीना सीखें: काम के तनाव और असफलता के डर से मुक्ति का दिव्य मार्ग
आज की सबसे बड़ी समस्या 'परिणाम की चिंता' (Anxiety of Results) और 'अहंकार' (The Ego of Doership) है। हम काम इसलिए नहीं करते कि वह हमारा कर्तव्य है, बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि हमें उससे कुछ चाहिए—नाम, पैसा या फेम। और जब नतीजा वैसा नहीं मिलता जैसा हमने सोचा था, तो हम टूट जाते हैं। हम 'पाप' या गलतियों के डर से इतने सहमे रहते हैं कि कठिन फैसले लेने से कतराते हैं। हम दुनिया के 'पानी' में पूरी तरह भीग चुके हैं, यानी सांसारिक तनाव हमारे भीतर तक समा गया है।

Dr.Madhavi Srivastava
12 फ़र॰3 मिनट पठन


ध्यान का विज्ञान
आज कई साधक स्वयं से पूछते हैं, "मैं ध्यान कैसे करूँ?" मन बेचैनी से भटकता रहता है, एक विचार से दूसरे विचार में भागता रहता है, चिंताओं, स्मृतियों या इच्छाओं से चिपका रहता है। वेदों से लेकर भगवद्गीता तक, युगों-युगों से शास्त्र एक सरल किन्तु गहन उत्तर देते हैं: ईश्वर का ध्यान करो। मन को ईश्वर पर स्थिर करने से असंभव भी संभव हो जाता है और अप्राप्य भी साध्य हो जाता है। इस अभ्यास को रूप-ध्यान, या ईश्वर के स्वरूप का ध्यान कहते हैं।
पवित्र ग्रंथों के परिदृश्य में, एक शिक्षा अत्यंत स्पष

Dr.Madhavi Srivastava
10 फ़र॰7 मिनट पठन


ऋत: ब्रह्मांड, धर्म और कर्म का शाश्वत आधार
"ऋत: ब्रह्मांड, धर्म और कर्म का शाश्वत आधार " ऋत वह शाश्वत अनुशासन है जो ब्रह्मांड, समाज और जीवन को संचालित करता है। ऋत, समाज से जुड़ता है, तो धर्म कहलाता है

Dr.Madhavi Srivastava
21 दिस॰ 20257 मिनट पठन


स्वतंत्र इच्छा: भगवद्गीता में आध्यात्मिकता का गहरा संदेश
'विमृष्यैतद् अशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु' की गहराई का अन्वेषण करें और चयन की स्वतंत्रता और आध्यात्मिक जागृति की खोज करें। 'विमृष्यैतद् अशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु' में गोता लगाएँ।

Dr.Madhavi Srivastava
6 नव॰ 20254 मिनट पठन


स्कंद: दिव्य योद्धा की उत्पत्ति और वीरता की गाथा
स्कंद: दिव्य योद्धा की उत्पत्ति और वीरता की गाथा- जानिए भगवान स्कंद की रहस्यमयी उत्पत्ति, प्रशिक्षण और तारकासुर के वध तक की अद्भुत कथा।एक दिव्य योद्धा की कहानी।

Dr.Madhavi Srivastava
13 अग॰ 20255 मिनट पठन


श्री राम पंचरत्न स्तोत्रम्-महत्व, अर्थ और लाभ
श्री राम पंचरत्न स्तोत्रम् एक प्राचीन और दिव्य भक्ति स्तोत्र है, जिसे महान आद्य शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। यह स्तोत्र भगवान राम के

Dr.Madhavi Srivastava
18 सित॰ 20244 मिनट पठन


ब्रह्मसूत्र: वेदान्त का आधारभूत ग्रंथ
ब्रह्मसूत्र वेदान्त दर्शन का मुख्य ग्रंथ है, जिसे बादरायण (व्यास) ने रचा है। यह ग्रंथ आत्मा, ब्रह्म और जगत के गूढ़ रहस्यों को समझने के लिए म

Dr.Madhavi Srivastava
15 जुल॰ 20249 मिनट पठन


कबीर के दोहे: सरल शब्दों में गहरी सिखावन
कबीरदास का जीवन सादगी और सेवा का प्रतीक था। उन्होंने भक्ति आंदोलन को नया दृष्टिकोण दिया और अपने समय के सामाजिक और धार्मिक आडंबरों का खुलकर व

Dr.Madhavi Srivastava
20 जून 20244 मिनट पठन


सरयू के तट पर: राजा दशरथ और ऋषि श्रृंगी की कथा
यह कथा सरयू नदी के तट पर स्थित अयोध्या नगरी की है, जहां राजा दशरथ पुत्र न होने के दुःख से व्यथित हैं। उनकी रानी कौशल्या उन्हें महान ऋषि श्रृ

Dr.Madhavi Srivastava
20 जून 20243 मिनट पठन


दरिद्रता दूर करने का चमत्कारी स्तोत्र— "दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम्", हिंदी अनुवाद सहित
घोर आर्थिक संकट या ऋणग्रस्तता का सामना करना किसी भी व्यक्ति के लिए अत्यंत कठिन परिस्थिति होती है। व्यापार में हानि और आर्थिक समस्याएं न केवल व्यक्ति को मानसिक तनाव देती हैं, बल्कि परिवार और सामाजिक जीवन पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे समय में, धर्म और आध्यात्मिक उपाय सहारा बन सकते हैं। महर्षि वशिष्ठ द्वारा रचित "दारिद्रय दहन स्तोत्र" एक ऐसा ही प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसे शिवजी की आराधना के साथ प्रतिदिन पाठ करने से व्यक्ति को विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है।

Dr.Madhavi Srivastava
16 जून 20245 मिनट पठन
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