top of page
Blog


नादब्रह्म: संगीत और चेतना का दिव्य मिलन
नादब्रह्म: संगीत और चेतना का दिव्य मिलन से जानें भारतीय संगीत की आध्यात्मिक गहराई और ब्रह्मांडीय व्यापकता। नादब्रह्म: संगीत और चेतना का दिव्य मिलन का अन्वेषण करें।
भारतीय संस्कृति में संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार और ईश्वर प्राप्ति का एक मार्ग माना गया है। प्राचीन ऋषियों और शास्त्रकारों ने ध्वनि (Sound) को 'ब्रह्म' का स्वरूप माना है। इसी दार्शनिक पक्ष को १३वीं शताब्दी के महान संगीतज्ञ पंडित श्राङ्गदेव ने अपने ग्रंथ 'सङ्गीतरत्नाकर' के मंगलाचर

Dr.Madhavi Srivastava
31 मार्च4 मिनट पठन
bottom of page